Saturday, 9 June 2018

मां-पापा

आजकल मां-पापा आये हुए हैं। तो अभी शब्दों को वीराम है। अभी कुछ नहीं लिख रहे हैं।

डूबने वाले ने डूबते साहिल को आवाज दी...

वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...।  दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...