Saturday, 27 May 2017

शतरंज, जीवन और हम..

हम छोटे होते हैं, और जीवन हमारे सामने शतरंज बिछा देता है. उस वक्त हम पहली गलती करते हैं... मस्ती के लिए एक प्यादे की चाल चल देते हैं. बस यहीं से हम खेल में चुन लिए जाते हैं. हम काले और सफेद खानों के बीच बांट दिए जाते हैं. नियम इतने सख्त होते हैं, कि ना खेल छोड़ सकते हैं, और ना ही पाला बदल सकते हैं.
हमें अपने जीवन का राजा बना दिया जाता है, जिसके हाथ में कुछ नहीं रहता. इस खेल में हम सालों बने रहते हैं. हर दिन सुबह उठकर देखते हैं, कि जीवन ने कौन सी चाल चली है. जीवन भी कभी तेज चलता है, तो कभी शांत देखता रहता है. हम इस बीच छोटे बड़े कंप्रोमाइज करते रहते हैं. हम समय से समय मांगते हैं. चिल्लाकर कहना चाहते हैं, सुनो... मैं ना काले में हूं, और ना ही सफेद में. फिर हम चुपचाप खेल में शामिल हो जाते हैं. अंत तो आना ही है.. कभी पहले तो कभी देर से... इसलिए बाजी पर पकड़ मजबूत करना चाहते हैं. मगर होता क्या है... हम जीतते कभी नहीं हैं... बस हार को टालने की कोशिश में खेल से हमें बाहर कर दिया जाता है....

धर्म को मानने वाले लोगों का दिल बड़ा क्यों नहीं होता?

मैं बहुत से ऐसे लोगों से मिला हूं, जो बेहद धार्मिक होने का दावा करते हैं, लेकिन कुछ वक्त बात मैं महसूस करता हूं, कि उनका दिल छोटा रह गया है. छोटी छोटी बातों को वो बड़ा कर देते हैं. और ऐसे वक्त मुझे काफी आश्चर्य होता है, कि इन्होंने भगवान के बारे में पढ़कर क्या सीखा है ? पता नहीं क्या समझा है? और कभी कभी मैं इस नतीजे पर पहुंच जाता हूं, कि ये धर्म को धोखा दे रहे हैं. एक बाह्य आवरण में ये छलावे से कम नहीं है.
ऐसे लोगों से अच्छा तो मैं हूं, जो बड़ी बड़ी बातों को भी इसलिए इग्नोर कर देता हूं, कि छोड़ो ना, सब मोह माया है...
अब ये धर्म क्या सिखाता है... कि नेक काम करो, एक दिन जाना ही होगा...
अब मान लीजिए आप पांच लाख रुपया हर महीना कमाते हैं, तो क्या हो गया? हां आप बेहतर जिंदगी जी सकते हैं, मगर फिर आपके धार्मिक होने के दिखावे से क्या फायदा.
सिंपल सा मैं सोचता हूं, दिल बड़ा रखिए...

निर्मोही दुनिया

क्राइम स्टोरीज लिखने के दौरान पिछले साल दो साल में मैंने देखा है, कि अवैध संबंध की वजह से सबसे ज्यादा हत्याएं हो रही हैं. और उनमें भी बहुत सारी हत्याओं के पीछे महिलाओं/पत्नियों का हाथ रहा है.
ऐसे कंडीशन में तलाक लेना या देना ज्यादा बेहतर है, कि आप किसी का कत्ल कर दें या करवा दें. 
वाट्सएप पर पनपे प्यार भी बहुत हत्याएं करवा रहा है.
बहुत निर्मोही हो रही है ये दुनिया....

कल रात खत्म हुई फिल्म the Walk से...

उसे पता था कि उसकी मौत होने वाली है. वो ये भी जानता था, कि वो मौत के रास्ते पर चल रहा है, मगर मंजिल उसे मौत से ज्यादा हसीन लग रही थी. अमेरिका के ट्विन टावर पर तनी रस्सियों पर चलना, वो भी बगैर किसी सुरक्षा के, मौत के रास्ते पर ही तो चलना है. फिल्म देखते वक्त फिलिप पेट्टी को मैं कई बार पागल कह बैठा. कई बार मुझे लगा कि कहीं मेरा ही हार्ट फेल ना हो जाए.. लेकिन जुनून जिंदगी से बढ़कर हो तभी असंभव पर विजय पाया जा सकता है.
कहानी असली थी. ऐसा सच में हुआ था. फ्रांस के कलाकार फिलिप पेट्टी की जिद थी ट्विन टावर रस्सी के सहारे पार करने की. जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर रस्सी पर खड़ा हीरो कहता है, 'ऐसा लग रहा है, कि ये टावर्स मेरा साथ दे रहे हैं, ये हवाएं मेरा साथ देने के लिए बह रहीं हैं. ये तार मेरे पैरों को सहारा दे रहा है'.
जिंदगी, जिद, पीड़ा, जख्म, नाम, साहस, पागलपन, मौत.....जीत.
नीचे जमीन पर सैकड़ों लोगों की भीड़ उस अविश्वसनीय दृश्य को साक्षात देख रही थी. सब खामोश...नि:शब्द. पसीना जब माथे का मुकुट बन जाए तभी तो दुनिया मानती है, कि हां...तुम कुछ हो.. मगर वो दुनिया को कुछ दिखाना या साबित करना नहीं चाह रहा था, वो तो बस एक सीख दे रहा था, असंभव कुछ नहीं है, बस चाहत होनी चाहिए..

पैटर्न .....और फिर हम फंस गये.

आजकल इतनी गर्मी रहती है कि ज्यादा चाय पीने का मन नहीं करता, इसलिए सारा जोर कोल्ड ड्रिंक पर रहता है. कोल्ड ड्रिंक के साथ आजकल मैं अपना मोस्ट फेवरेट सॉंग सुनता रहता हूं. Chris isaak की Cant fall in love with you. इस गाने का हर लाइन मुझे बहुत प्यारा लगता है. लेकिन ये गाना सुनने से पहले Somewhere over the Rainbow सुनता हूं. ये गाना अच्छा है, मगर उतना पसंद नहीं. लेकिन पहले यही गाना सुनने का एक पैटर्न बन चुका है. अगर cant fall in love with you पहले प्ले हो गया, तो मैं रोक देता हूं, और somewhere over.. पहले प्ले कर देता हूं. ये कुछ इस तरह से है, जैसे सुबह चाय पीने से पहले ब्रश करना या रात में खाना खाने के बाद ही सोना. इसे मैं स्किप नहीं कर पाता.
जीवन में हम पहली बार गलती से एक गलती करते हैं, और हम एक पैटर्न में बंध से जाते हैं. उस पैटर्न से निकलना मुश्किल नहीं होता, पर निकलने की जहमत कौन उठाए, ये सोचकर हम उसमें फंसे से रह जाते हैं. खरगोश और हाथी, जिसे हमने बचपन में कभी कहानी पढ़ते वक्त अपना साथी बना लिया होता है, वो हमारा साथ छोड़ जाते हैं, फिर हम एक जंगली कबूतर को अपना साथी कहना शुरू कर देते हैं. ये वाला हमारा नया साथी हमें अकसर छोड़कर उड़ जाता है और हम फिर किसी नये साथी की तलाश में उस बने बनाए पैटर्न में पिसते रहते हैं. जैसे अभी कुछ दिनों पहले तक चाय के बिना मैं रह नहीं पाता था, सोचता था मैं चाय नहीं पीयूंगा, तो शायद सुबह गीत नहीं गाएगी या सूरज को गुस्सा आ जाएगा. पर चाय की जगह अब कोल्ड ड्रिंक ने ले लिया और अब एक नया सा पैटर्न मुझे अपने में फांस चुका है. अब हर दिन कोल्ड ड्रिंक मुझे चाहिए होता है, और मैं उसे पीने से इनकार नहीं कर पाता.

बेचैनी

कभी-कभी स्क्रिप्ट लिखते वक्त दिमाग में कुछ नहीं आता है, कि कैसे शुरूआत करें या कैसे आगे बढ़ा जाए. तब ऐसा लगता है, जैसे कोई भंवरा दिमाग के अंदर बंद हो गया हो, और बाहर निकलने के लिए बार-बार उड़ता हो, लेकिन दिमाग की जाली से टकराकर गिर जाता हो।...इस समय अंदर की बेचैनी और उथलपुथल से पार पाने के लिए मन हो रहा है, कि किसी रिंच या किसी औजार से दिमाग के दरवाजे को खोल दिया जाए, और भंवरे को मुक्त कर बेचैनी से निजात पाई जाए।...

सम्मोहन

पंखे की शोर सन्नाटे को भेद रही थी और करवटों के बीच गोपी बोल पड़ी- सम्मोहन देसी शराब की तरह होता है क्या?
- नहीं, सम्मोहन इत्र है, कुछ देर की खुशबू फिर महक की जगह गंध रह जाता है.
- हूं, लेकिन एक दफे भांग खाने के बाद मैं सिर्फ हंस रही थी. फिर पता नहीं चला कि कैसे किसी की हथेली पर मैं सिर रखके सो गई थी, दो ऊंगलियों को मैंने अपनी ऊंगलियों से पकड़ रखा था.
- ये क्या सवाल है ? सम्मोहन, देसी शराब, इत्र, भांग.. इनकी आदत व्यसन कहलाती है. और व्यसन बुरी चीज है. इन चीजों से भला सम्मोहन का क्या तालमेल? तुम्हारी ऊंगलियों से जरूर कोई धागा उलझ गया होगा.
- हूं, शायद...तो सम्मोहन फिर एक धागा है. जिसके दोनों सिरे हमारी ऊंगलियों से ही उलझे रहते हैं. फिर हम उन्हें निर्ममता से तोड़ कर किसी कचरे के पात्र में या किसी खाली स्थान पर फेंक देते हैं.
-- शायद तुम ठीक कह रही हो, सम्मोहन एक धागा ही है.
-- हूं, फिर इसका मतलब मौत सिर्फ सजीवों को ही नहीं आती है. मरना निर्जीवों को भी पड़ता है.
पंखे की शोर अब भी सन्नाटे को भेद रही थी पर करवटों पर अब किसी ने भारी पत्थर रख दिया था.

डूबने वाले ने डूबते साहिल को आवाज दी...

वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...।  दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...