जब कभी आप सम्मोहन में कैद होते हैं, तो आप एक अदृश्य दुनिया में भटकने लगते हैं। उस मूरत से मोहब्बत करने को जी चाहता है। एक अदृश्य आवाज का हम पीछा करने लगते हैं। एक मायावी घटना का आप गवाह बनना शुरू कर देते हैं। हम छायावादी प्रेम संबंध की तरफ बढ़ने लगते हैं। उम्र के फासले ....पहाड़ के हासिये पर रखे किसी पत्थर के छोटे टुकड़े की तरह किसी खाई में गिरता दिखता है। आप एक अप्रत्याशित वक्त में बंधने लगते हैं।
उन दोनों के बीच उम्र का फासला काफी ज्यादा था। पर वो उसकी तरफ काफी ज्यादा आकर्षित हो चुकी थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि वो क्या करे। उसकी चाहना में सबसे खास बात ये थी, कि उसका मन स्वार्थविहीन था। कभी कभी उसका मन बस एक आलिंगन के लिए तरसता था। जबकि, उसे पता था, जिस चेहरे की तरफ वो आकर्षित हुई है, जिस सम्मोहन के फांस में वो फंसी है, वो पहले से ना सिर्फ शादीशुदा है, बल्कि, बड़े हो चुके दो बच्चों का पिता भी है। मगर, उसे अपनी चाहना पर कोई कंट्रोल नहीं था। और सच तो ये है, कि उस वक्त वो अपनी भावनाओं पर कोई कंट्रोल चाहती भी नहीं थी। उसे उमड़ने देना चाहती थी। मेघ की तरह... बरसने देना चाह रही थी। उसका मन बेहद कोमल था और नाजुकता के उस धागे से बिंधा हुआ था, कि उस सिचुएशन को हम निस्वार्थ प्रेम ही बस कह सकते हैं। और कुछ नहीं। जबकि, उसे पता था...कि पहले से ही किसी और संबंध में है, और उस संबंध से भी वो बाहर निकलना नहीं चाह रही थी। उसके शब्दों की मादक गंध उसके भीतर उतर चुकी थी। ज्यादा ख्वाहिश नहीं कर रही थी वो...बस एक आलिंगन चाह रही थी। एक छुअन... एक चुंबन से संतुष्ट होना चाह रही थी वो।
प्रेम का यह कौन सा रूप है मायावी ?
वो जिस छलावे के आकर्षण में कैद हुई थी, कुछ दिनों के लिए उसके अलावा और कुछ ख्याल नहीं रहता था उसे। वो इस संबंध को प्रेम का भी नाम नहीं दे रही थी, वो इसे एक पवित्र बंधन मान रही थी...। बेहद पवित्र। हालांकि, दुनिया के लिए ये संबंध काफी विचित्र...एक किस्म का पागलपन...एक किस्म की गाली हो सकती थी। पर उसके लिए ये रिश्ता आत्मा जैसा पवित्र था। बेहद पवित्र।
उस रिश्ते से उसे कुछ हासिल नहीं करना था....कुछ पाना नहीं था...। ना कोई नाम देना था। दोनों ने अपने- अपने अहसास एक दूसरे से साझा किए। कोई संबंध नहीं था उनके बीच, पर वो अजनबी नहीं रहे। किसी किस्म का कोई हक नहीं था उनका एक दूसरे के ऊपर....और ना ही किसी किस्म के वादों की जंजीर में जकड़े थे दोनों..। एक छुअन...एक आलिंगन...एक चुंबन...और कुछ वक्त सीने से लगने की ख्वाहिश थी बस उनके दरम्यां।
आकर्षण का अवसान होता है। एक निश्चित वक्त के बाद आकर्षण अपनी आखिरी सांसे ले चुका होता है। यहां भी यही हुआ। एक अजन्मा खूबसूरत रिश्ता था...जो अधूरा होकर भी मुकम्मल बन गया।
उन दोनों के बीच उम्र का फासला काफी ज्यादा था। पर वो उसकी तरफ काफी ज्यादा आकर्षित हो चुकी थी। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था, कि वो क्या करे। उसकी चाहना में सबसे खास बात ये थी, कि उसका मन स्वार्थविहीन था। कभी कभी उसका मन बस एक आलिंगन के लिए तरसता था। जबकि, उसे पता था, जिस चेहरे की तरफ वो आकर्षित हुई है, जिस सम्मोहन के फांस में वो फंसी है, वो पहले से ना सिर्फ शादीशुदा है, बल्कि, बड़े हो चुके दो बच्चों का पिता भी है। मगर, उसे अपनी चाहना पर कोई कंट्रोल नहीं था। और सच तो ये है, कि उस वक्त वो अपनी भावनाओं पर कोई कंट्रोल चाहती भी नहीं थी। उसे उमड़ने देना चाहती थी। मेघ की तरह... बरसने देना चाह रही थी। उसका मन बेहद कोमल था और नाजुकता के उस धागे से बिंधा हुआ था, कि उस सिचुएशन को हम निस्वार्थ प्रेम ही बस कह सकते हैं। और कुछ नहीं। जबकि, उसे पता था...कि पहले से ही किसी और संबंध में है, और उस संबंध से भी वो बाहर निकलना नहीं चाह रही थी। उसके शब्दों की मादक गंध उसके भीतर उतर चुकी थी। ज्यादा ख्वाहिश नहीं कर रही थी वो...बस एक आलिंगन चाह रही थी। एक छुअन... एक चुंबन से संतुष्ट होना चाह रही थी वो।
प्रेम का यह कौन सा रूप है मायावी ?
वो जिस छलावे के आकर्षण में कैद हुई थी, कुछ दिनों के लिए उसके अलावा और कुछ ख्याल नहीं रहता था उसे। वो इस संबंध को प्रेम का भी नाम नहीं दे रही थी, वो इसे एक पवित्र बंधन मान रही थी...। बेहद पवित्र। हालांकि, दुनिया के लिए ये संबंध काफी विचित्र...एक किस्म का पागलपन...एक किस्म की गाली हो सकती थी। पर उसके लिए ये रिश्ता आत्मा जैसा पवित्र था। बेहद पवित्र।
उस रिश्ते से उसे कुछ हासिल नहीं करना था....कुछ पाना नहीं था...। ना कोई नाम देना था। दोनों ने अपने- अपने अहसास एक दूसरे से साझा किए। कोई संबंध नहीं था उनके बीच, पर वो अजनबी नहीं रहे। किसी किस्म का कोई हक नहीं था उनका एक दूसरे के ऊपर....और ना ही किसी किस्म के वादों की जंजीर में जकड़े थे दोनों..। एक छुअन...एक आलिंगन...एक चुंबन...और कुछ वक्त सीने से लगने की ख्वाहिश थी बस उनके दरम्यां।
आकर्षण का अवसान होता है। एक निश्चित वक्त के बाद आकर्षण अपनी आखिरी सांसे ले चुका होता है। यहां भी यही हुआ। एक अजन्मा खूबसूरत रिश्ता था...जो अधूरा होकर भी मुकम्मल बन गया।

