Wednesday, 8 February 2017

आसमान में चित्र

कुछ सालों से मैं एक चित्र देखता आ रहा था. मैं उस चित्र को इतनी बारिकी से देखता था, कि धीरे धीरे उससे पहचान हो गई. उसके एक एक लकीर को मैं अच्छी तरह पहचान गया. मुझे हमेशा लगता था, कि किसी दिन उस चित्र से एक चेहरा निकलेगा और मेरी तरफ हाथ बढ़ाएगा. मुस्कुराएगा, हो सकता है मेरे गले भी लग जाए, मुझसे ढेर सारी बातें करे और मुझसे कहे, कि आखिर हम मिल ही गये...
एक दिन मैंने हिम्मत करके चित्र से पूछ ही लिया, हम एक अर्से से एक दूसरे को देख रहे हैं, मैं तुम्हें देखने के लिए ही इस रास्ते से गुजरता हूं, जब तुम किसी दिन आकार लोगे तो क्या मुझे पहचान पाओगे..?
चित्र हमेशा की तरह खामोश रहा...भावहीन, शब्दहीन..
मैं चाय लेकर अपनी बालकनी से रास्ते पर आ जा रहे लोगों को देख रहा था. सामने रास्ते के दूसरी तरह कुछ घर हैं. घरों के बीच से कुछ गलियां गुजरतीं हैं. गलियों में कुछ बच्चे खेल रहे थे. मैं उनके शोर से कुछ अनसुलझा अर्थ निकाल रहा था. तभी मुझे एक परछाई दिखी. मैं होठों पर पतली मुस्कान लिए उस परछाई को देखने लगा. धीरे धीरे वो परछाई सामने आने लगी. मैंने अपनी गर्दन बालकनी से थोड़ी और बाहर निकाल ली. मुझे उसका चेहरा नज़र आने लगा. चेहरा देखते ही मैं हतप्रभ रह गया. वो मेरा चित्र था, जो रास्ते से गुजर रहा था. मैं चाय छोड़कर नीचे भागा...वो आगे जा रही थी. मैं उसे आवाज देना चाहता था, लेकिन मुझे उसका नाम नहीं पता था. मैं जोर से चिल्लाया... चित्र... लेकिन वो नहीं सुनी.. मैं तेज भागने लगा.. उसके पास पहुंच गया, बिल्कुल पास.. वो हुबहू मेरी चित्र ही थी. मैं हांफ रहा था, वो आश्चर्य से मुझे देख रही थी. मैंने उसकी तरफ देखकर इशारा किया, तुम चित्र हो ना..?
वो आश्चर्य से और थोड़ा डरकर भी मुझे देखे जा रही थी
तुम चित्र हो ना, जिसे मैं अकसर देखता हूं..??
कौन सा चित्र..? मैं कोई चित्र नहीं हूं..?
नहीं, हो तुम... हम अकसर मिलते हैं...
कहां..? मैं तुमसे नहीं मिली हूं..
हां, मिली हो..वहां
मैंने आसमान की तरफ ऊंगली से इशारा किया.. वो मेरी ऊंगलियों से होते हुए आसमान देखने लगी..ऊपर आसमान से कुछ बादल के टुकड़े चिपके हुए थे. हल्के से उभरता चांद किसी कैनवाश की तरह दिख रहा था. दो चार तारे धुंधला सा चमकने की कोशिश में थे..
मेरे हाथ आसमान की तरफ थे.. वो मुझे देखने लगी... कुछ क्षण ठहरी..फिर होठों से कुछ बुदबुदाते हुए बगल से गुजर गई.. मैं कभी आसमान तो कभी उसे देख रहा था....

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