Wednesday, 28 June 2017

मैं रेस हार चुका था...

हमारी गलती ये होती है कि हर सुबह उठकर हम सुबह को चमत्कार मानना भूल जाते हैं. रात में जो सपना देखा था, उसे कुल्ला कर देते हैं, और फिर एक रेस में लग जाते हैं. जो काम हम करते हैं, या जो हमारा लक्ष्य होता है, उसमें तो हम रेस लगाते ही हैं, इसके विपरीत भी हम कभी कभार अनजाने में ही रेस लगा बैठते हैं.
सामने ई-रिक्शा खड़ी थी. चार लोग उसपर बैठे थे. एक सीट खाली था. मैं ई-रिक्शा पर बैठने के लिए आगे बढ़ रहा था, और दूसरी तरह से एक लड़की भी बैठने के लिए आ रही थी. अभी हमने एक दूसरे को नहीं देखा था, दोनों जल्दबाजी में थे. ई-रिक्शा बीच में खड़ी थी. कुछ 8/10 कदम जब बचे होंगे तो हमारी नजरें अचानक मिलीं. हमने सीट की तरफ देखा. हम जान गये थे, सीट बस एक है, और कोई एक ही बैठ सकता है. अब अचानक से एक रेस शुरू हो गई थी. दोनों के कदम थोड़ा तेज चलने लगे. दोनों एक साथ सीट के पास पहुंचे, पर कुछ सेकेंड्स से उसने मुझे हरा दिया. वो ई-रिक्शा पर बैठ चुकी थी. मैं मुस्कुराकर रह गया. फिर दूसरे रिक्शे पर बैठा. 
अनजाने में ही सही मैं सुबह सुबह एक रेस हार चुका था. 

Tuesday, 13 June 2017

आंसूं आंखों में ना आने पाए

एक जूनियर लड़की ने कभी मुझसे पूछा था, कि सर.. वो फलां सर मुझे परेशान करते हैं, मुझे क्या करना चाहिए. मैंने कहा- किस तरह का परेशान? 
वो बोली- मेंटली. 
मैंने कहा- सरेआम थप्पड़ मार दो. 
ये कई साल पुरानी बात है. नारीवाद पर मैं कभी लिखना नहीं चाहता और मेरा मन भी नहीं करता. पर थप्पड़ मारने वाली बात पर मैं अभी भी कायम हूं और शायद आगे भी रहूंगा.
कुछ परिस्थितिवश आज लिख रहा हूं. सच तो ये है, कि एक लड़की को किसी भी परिस्थिति में कुछ भी बर्दाश्त नहीं करना चाहिए. उसे लड़ पड़ना चाहिए, मारपीट कर लेनी चाहिए, पर आंसू नहीं बहाना चाहिए. 
मैं यहां परिस्थिति का जिक्र नहीं करूंगा.
कुछ साल पहले एक शो बनाते वक्त पैकेजिंग करवा रही एक लड़की ने अनजाने में बड़ी गलती कर दी. गुस्से में आकर मैं उसे डांट गया. बाद में मैंने उस लड़की की आंखों में आंसू देखा. मुझे बहुत खराब लग रहा था. 
बाद में ये बात मैंने नेहा को बताई. उसने लड़कियों के आगे बढ़ने के दौरान होने वाली परेशानियों का जब जिक्र किया तो मैं उसे जानकर शॉक रह गया था. उसने तो मुझे यहां तक कहा -- " एक लड़की का अगर कोई सबसे बड़ा दुश्मन होता है, तो वो उसकी अपनी मां होती है, बाद में कोई और". खैर, मैंने उस लड़की से माफी मांग ली थी. और उस दिन के बाद से लड़कियों पर गुस्सा ना होने का संकल्प मैंने ले लिया. 
रिश्तों के बंधन में बंधी लड़कियां अकसर बहुत कमजोर हो जाती हैं. चाहे वो रिश्ता भाई का हो या पति का. अपनी मर्जी का करना वो भूलने लगती हैं. बात बात पर भाई की तरफ देखना या पति की तरफ देखना. हर बात के लिए इजाजत लेना. कंप्रोमाइज करना. चुप रह जाना. ये बातें कोई नई नहीं हैं, पर अभी भी हैं. 
मैं कुछ नया नहीं कह रहा... पर तुमसे कह रहा हूं, बर्दाश्त मत करो. चुप मत रहो. आवाज उठाओ. लड़ो.. झगड़ो.... मारपीट करो... स्वाभिमानी बनो... मुंह ताकना बंद करो. रिश्ते में रहो लेकिन स्वाभिमान के साथ. प्रेम करो लेकिन इज्जत के साथ. अपने मन की करो...मनमर्जी करो.. खुश रहो और ध्यान रहे... आंसूं आंखों में ना आने पाए........

डूबने वाले ने डूबते साहिल को आवाज दी...

वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...।  दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...