Saturday, 27 October 2018

बहकी हुई बातें... बहके हुए हम... । तुम याद आए.....

वो जमीन से हजारों फीट की ऊंचाई पर था...। आकाश में टिमटिमाते हुए तारों को देख रहा था..। जमीन पर भी हजारों दिए तारों की तरह ही दिखाई दे रहा था।... कितना अजीब सा अहसास था ये...। ये कोई पहली मर्तबा नहीं था...जब वो हवाई जहाज में सफर कर रहा था...मगर, अभी उसे ख्याल आ रहा था...कि अगर अभी प्लेन क्रेश कर जाए...तो क्या होगा ? सब मर जाएंगे...। आकाश में ही सब जल जाएंगे..। एक पल में सौ से ज्यादा लोग मर जाएंगे...।

उसकी आंखों में आंसू थे..। वो एक ऊंगली से आंखों के आसुंओं को पोंछ रहा था...। नहीं, वो डरा बिल्कुल भी नहीं था....मगर, कुछ था...जो आंखों में नमी बनकर उतर रहा था...। पानी का एक कतरा...। दो बूंदे...। भींगी सी...। वो भागना चाहता था...। वो भाग जाना चाहता था..।। किससे...  पता नहीं...। कहां... पता नहीं...। कितनी दूर पता नहीं...। मगर, अभी इस वक्त वो भाग जाना चाहता था...। कहीं दूर....सबसे दूर..। जहां, सिर्फ अकेलापन हो...। सिर्फ अकेलापन...।

क्या बचता है एक बार मर जाने के बाद..। क्या है इज्जत....। क्या है प्रतिष्ठा...। क्या है शान...। क्या होता है अपमान...। कौन करता है अपमान...? हजार सवाल... हजार जवाब...। पर किसे बताए...कौन सुने... । सुनकर कोई क्या करे...। एयर होस्टेस से उसने कहा....एक ग्लास पानी चाहिए...। जी सर, अभी लाती हूं...।


एक बार मर जाने के बाद कौन देखता है, कि उसने अपनी जिंदगी में क्या किया है...। क्या खोया है, क्या पाया है...। उसकी आंखों के सामने मां थी...पापा थे...बहन, भाई....और वो रिश्ता...जिसे वो कभी खोना नहीं चाहता था...। लेकिन, किसे बताए वो इतनी सारी बातें...। बिना बताए कोई सबकुछ क्यों नहीं समझ लेता है...? 

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