Saturday, 12 April 2014

कसक

कसक....................... PART_1...................................अभिजात शेखर झा

वो मुझे बहुत अच्छी लगती है...लेकिन वो मेरी तरफ देखती ही नहीं है...हमेशा पढ़ाई.. पढ़ाई... पढ़ाई...अब इतना कोई पढ़ता है क्या...मतलब, जीना नहीं, जिंदगी ही पढ़ाई हो गई है...धैर्य मन ही मन खीज रहा था, उसे गुस्सा आ रहा था, या वो हमेशा की तरह आज भी परेशान था...उसे समझ नहीं नहीं आ रहा था...धैर्य को परेशान देख...उसका दोस्त...रघु ने उससे पूछा...अबे, जब तुम उससे इतना प्यार करते हो, तो फिर बोलते क्यों नहीं........

यार अब तुम भी मेरा दिमाग मत खराब करो...जब देखते हो कि, वो मुझसे बात तक नहीं करती है, तो फिर मैं उससे दिल की बात कैसे कह दूं...धैर्य थोड़ा गुस्सा, और थोड़े मायूसी की अंदाज में बोला...
यार ये भी सही है...रघु ने धैर्य की बातों को सुनने के बाद..धीरे से बुदबुदाया...खैर छोड़ो...अभी मुझे कुछ काम है...मैं जा रहा हूं..कल फिर मिलते हैं कॉलेज में....
बिजनेश कॉलेज ऑफ देहरादून...देहरादून का ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान का शान....यहां एडमिशन मिलने के बाद...छात्र अपने आप को लकी समझते थे...दिल्ली का रहने वाला धैर्य इस कॉलेज में दो साल पहले एडमिशन लिया था...और अब उसका आखिरी साल चल रहा था...रिचा भी उसके साथ ही पढ़ती थी...रिचा को अपनी जिंदगी में कुछ बनना था...वो जमाने को दिखाना चाहती थी, कि एक मध्यम वर्ग की लड़की क्या कर सकती है...हालांकि, वह लखनऊ की रहने वाली थी, लेकिन वह एक महत्वाकांक्षी लड़की थी...
एक दिन...कॉलेज में क्लाश चल रहा था...सभी स्टूडेंट प्रोफेसर का लेक्चर सुन रहे थे...लेकिन धैर्य एक-टक रिचा को देख रहा था...अचानक...रिचा का ध्यान धैर्य की तरफ गया...अचानक धैर्य और रिचा की नजरें मिलने की वजह से धैर्य झेंप गया...और उसने नजरें झुका ली...लेक्चर खत्म हुआ...धैर्य अपनी जगह पर ही बैठा रहा...उसे बाहर जाने का मन नहीं था...सभी स्टूडेंट क्लाश से बाहर चले गये...तभी रघु उसके पास आया, और पूछा...भाई, क्लाश खत्म हो चुका है...चलो केटीन चलते हैं...धैर्य ने ना में सिर हिला दिया...और फिर बोला, नहीं तुम जाओ...मुझे जाने का मन नहीं कर रहा है...रघु चला गया...तभी रिचा क्लाश के अंदर आ गई...शायद वह अपना पर्स क्लाश में ही भूल गई थी...रिचा को अचानक क्लाश रूम में देख, धैर्य सकपका गया...लेकिन, फिर उसने सोचा, क्यों ना हिम्मत करके...रिचा से बात की जाए...
रिचा...ये धैर्य की आवाज थी...
रिचा बोली...हां...
धैर्य...रिचा मैं तुमसे कुछ बात करना चाहता हूं...
रिचा... हां बोलो...क्या बात है...
धैर्य...वो...वो बात ये है कि, फाइनेंस में मुझे कुछ दिक्कत आ रही है...अगर तुम मेरी कुछ हेल्प कर दो...
रिचा....हां-हां..क्यों नहीं...कल लाईब्रेरी आ जाना...वहां हम लोग डिस्कस कर लेंगे...
धैर्य...आं....हां...ठीक है...कल मिलते हैं...
रिचा चली गई...धैर्य सोच रहा था, रिचा उतनी सख्त नहीं है, जितना वो सोच रहा था...लेकिन, अगले ही पल उसे ख्याल आया, कि वो कल पढ़ेगा क्या...उसने तो कुछ पढ़ा ही नहीं है...कोई बात नहीं...आज रात में वो पढ़ेगा...और सवालों की एक लंबी लिस्ट तैयार करेगा...ताकि, वो ज्यादा देर कर...रिचा से बातें कर सके...
रात हुई...धैर्य ने फाईनेंस किताब खोला...और एक कॉपी पर...कुछ सवाल लिखने लगा...उसने करीब 10 सवाल लिख डाले...और सोच रहा था, चलो इसी बहाने...रिचा से ज्यादा देर बातें तो होगी...अब ये सुबह कब होगा यार...ये रात इतनी बड़ी क्यों हो गई...यही सोचते-सोचते...धैर्य की आंखे कब लग गई...उसे पता ही नहीं चला...
सुबह हुई...धैर्य सोकर उठ चुका था...जल्दी जल्दी कॉलेज जाने के लिए तैयार होने लगा...
अरे यार, अभी तक नौ ही बजें है...अभी क्यों तैयार हो रहे हो कॉलेज जाने के लिए...हॉस्टल में रहने वाले एक दोस्त ने पूछा...
धैर्य बोला...बस ऐसे ही...आज जरा कुछ सवाल सॉल्व करने हैं...लाईब्रेरी में पढ़ाई करनी है...
धैर्य कॉलेज जल्दी-जल्दी पहुंचना चाहता था...ठीक दस बजे...वो कॉलेज में था...कॉलेज पहुंचने के साथ ही, वो सीधे लाईब्रेरी पहुंच गया...लाईब्रेमी में देखा तो, वहां बामुश्किल दो-चार लड़के-लड़कियां बैठे हुए थे...धैर्य लाईब्रेरी में सबसे पीछे वाली बैंट पर जाकर बैठ गया...समय गुजरने का नाम ही नहीं ले रहा था...ग्यारह बज गये...कब आएगी रिचा...धैर्य एक किताब उलटा-पुलटाकर इसी बारे में सोच रहा था...तभी उसने देखा कि, सामने से रचना आ रही है...रचना धैर्य के बगल में बैठ गई...और बोली...हां धैर्य बताओ, किस सवाल में दिक्कत हो रही है...
धैर्य ने वो पन्ना पलट गया, जो उसने रात में तैयार किया था...रिचा के सामने आठ सवालों की लिस्ट पड़ी थी...रिचा बोली, इतने सवाल...देखो, आज तो पूरे सवाल सॉल्व नहीं कर पाऊंगी...लेकिन, जो बच जाएंगे...उसपर कल डिस्कस कर लेगें...धैर्य ने हां में सिर हिला दिया...रिचा सवालों के जवाब बताए जा रही थी, और धैर्य एक अच्छे बच्चे की तरह रिचा को सुनते जा रहा था...पांच सवाल बताने के बाद...रिचा बोली...अच्छा धैर्य अब कल फिर आ जाना...मैं कल सारे सवाल बता दूंगी...इतना कहकर...रिचा जाने के लिए उठने लगी...
थैंक्स रिचा...धैर्य ने धीरे से कहा...
रिचा थोड़ी सी मुस्कुराकर बोली, यू आर वेलकम...कभी भी कोई प्रोब्लम हो, तो मुझसे पूछ लेना...जरूर...धैर्य बोला...रिचा चली गई थी...
कल की पढ़ाई फिर से शुरू हो गई...धीरे-धीरे रिचा और धैर्य आपस में दोस्त बन गये...पढ़ाई का सिलसिला भी चलता रहता था...अब रिचा और धैर्य के बीच काफी बातें होने लगी थी...लेकिन, धैर्य ने अभी तक अपने दिल की बात रिचा को नहीं बताई थी...
समय बीतता गया...एग्जाम का समय आ गया...और फिर देखते ही देखते...एग्जाम भी खत्म हो गया...और फिर वक्त आ गया...एक दूसरे को अलविदा कहने का...सभी दोस्त एक दूसरे को बॉय बोल रहे थे...किसी की आंखे नम थी...तो कोई आपस में हंसी मजाक कर रहा था...सभी जान रहे थे, आज के बाद...वो पता नहीं फिर से कब मिलने वाले हैं...धैर्य, रिचा के इंतजार में...इधर ऊधर देख रहा था...आज उसने सोच लिया था कि, वो रिचा से अपने दिल की बात कहकर ही दम लेगा...तभी सामने रिचा दिखी...वो श्रुति से बात कर रही थी...
रिचा...धैर्ये ने रिचा को पुकारा था...रिचा पलटी, और धैर्य को देखकर मुस्कुरा दी...और इशारे में बोली, अभी आ रही हूं...धैर्य रिचा का इंतजार करने लगा...कुछ ही देर में...रिचा आ गई...रिचा ने हाथ मिलाने के लिए...धैर्य के तरफ अपना हाथ बढ़ाया...धैर्य ने भी...हाथ बढ़ा दिया...और फिर दोनों के बीच बातें होने लगी...
कुछ देर बात करने के बाद...धैर्य बोला, रिचा मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं...ये बात मैं पिछले दो सालों से तुमसे कहना चाहता था, लेकिन आज तक नहीं कह पाया...लेकिन आज मैं कहना चाहता हूं...
क्या बात है बोलो धैर्य...अब मुझसे भी कुछ बोलने में तुम्हें सोचना पड़ेगा...
मैं तुमसे प्यार करता हूं...और शादी करना चाहता हूं...धैर्य एक ही सांस में बोल गया...
क्या...रिचा ऐसे रिएक्ट की, जैसे किसी को बिच्छू ने काट लिया हो....
हां रिचा...मैं तुमसे बेहद प्यार करता हूं...और मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं...धैर्य की आंखों में वाकई प्यार था, जिसे रिचा भी महसूस कर रही थी...और शायद इसीलिए, वो धैर्य से नजरें नहीं मिला पा रही थी...
कुछ देर खामोशी छाई रही...एक दम शांत...सब कुछ खामोश...
धैर्य, रिचा ने खामोशी तोड़ी...
धैर्य मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती...इनफेक्ट, मैं शादी करना ही नहीं चाहती...तुम एक अच्छे लड़के हो...लेकिन, मेरी सोच अलग है...मैं कुछ करना चाहती हूं...जिंदगी में मेरे एंबिसन कुछ अलग हैं...मैं शादी वादी के झमेले में नहीं पड़ना चाहती हूं...तुम समझ रहे हो ना, मैं क्या कह रही हूं...रिचा बोली....
हां, मैं समझ रहा हूं...मैने बस तुमसे दिल की बात कही है...कोई जबरदस्ती नहीं है...तुम्हारा फैसला मुझे मंजूर है...
रिचा बोली...धैर्य मैं, अमेरिका जा रही हूं...अगले महीने...और शायद ये हमारी आखिरी मुलाकात है...अपना ख्याल रखना...और फिर...रिचा जाने के लिए मुड़ी...
तुम भी अपना ख्याल रखना रिचा...और फोन करना...धैर्य बोला...
रिचा चली गई...धैर्य भी वापस दिल्ली आ गया...धैर्य के पिताजी दिल्ली में ही अपना बिजनेश चलाते थे...लेकिन दिल्ली में धैर्य का मन नहीं लग रहा था...कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद...धैर्य मुंबई चला गया...
समय बीतता गया...धीरे-धीरे तीन साल बीत गये...धैर्य ने खुब मेहनत किया...और कंपनी में एक अच्छे ओहदे पर पहुंच गया...धैर्य के पापा शादी की बात करने लगे थे....लेकिन, धैर्य हर बार टाल जाता था...उसने मुंबई में अपना फ्लैट भी खरीद लिया...
एक दिन...धैर्य अपनी ऑफिस पहुंचा...ऑफिस पहुंचते ही, उसके बॉस ने कहा, धैर्य...आओ मैं तुम्हें किसी से मिलवाता हूं...इतना कहकर धैर्य के बॉस जाने लगे...धैर्य भी उनके पीछे हो लिया...ऑफिस के दूसरे चेंबर में पहुंचने के बाद...धैर्य ने देखा कि, छोटे-छोटे बालों में एक लड़की सोफे पर बैठी थी...बिल्कुल प्रोफेशनल लुक...नेवी ब्लू ब्लेजर...आंखों पर चश्मा...धैर्य अभी उस लड़की के बारे में सोच ही रहा था, कि उसने बॉस ने कहा, धैर्य, ये हैं मिस रिचा वर्मा...इस कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल हुई हैं...कल से ये हमारी ऑफिस ज्वाइन कर रही हैं...
रिचा...अचानक धैर्य बोला...रिचा वर्मा...देहरादून कहूं या फिर लखनऊ...
धैर्य तुम...तुम यहां काम करते हो...रिचा बोली
हां...मैं यहां काम करता हूं...चलो अच्छा है, तुम यहां आ गई...
धैर्य के बॉस ने कहा, अच्छा तो आपलोग एक दूसरे को जानते हैं...
जी बॉस...हमलोगों ने एक साथ ही पढ़ाई किया है...
अच्छा, तो आपलोग बात कीजिए...मैं आ रहा हूं....इतना कहकर....धैर्य के बॉस चले गये...
रिचा...तुम तो अमेरिका में थी ना....यहां क्या कर रही हो...धैर्य ने कहा...
हां...पांच दिन पहले ही अमेरिका से लौटी हूं...अब यहीं काम करूंगी....
और बताओ...क्या सब चल रहा है, तुम्हारी जिंदगी में...शादी कर ली तुमने...रिचा बोली...
नहीं, अभी नहीं...अभी तक कोई मिली नहीं...धैर्य ने फिर उसी अंदाज में कहा...और तुमने....धैर्य ने जवाब के तुरंत बाद सवाल कर दिया...
नहीं....रिचा बोली...तुम्हें तो पता ही है ना, शादी करना मेरी प्रॉयोरिटी में नहीं है...अभी मुझे और आगे जाना है...चलो कॉफी पीने चलते हैं...रिचा बोली...
अच्छा...तो तुम कॉफी पीने लगी...धैर्य ने मजाकिया लहजे में कहा...
हां...क्यो नहीं...मैं तो शुरू से ही कॉफी पीती हूं...तुमने कभी पूछा ही नहीं कॉफी के लिए...रिचा भी मुस्कुराकर बोली...
दोनों ऑफिस के कैंटीन पहुंच गये थे...कॉफी आर्डर कर दिया गया...दोनों में बातचीत का सिलसिला चल पड़ा...
तुम मुंबई में रहती कहां हो...धैर्य ने पूछा...
अभी तो होटल में रह रही हूं...कोई अच्छा फ्लैट नहीं मिल रहा है...रिचा बोली...
जब तक तुम्हें फ्लैट नहीं मिलता, तुम मेरे यहां शिफ्ट हो सकती हो...धैर्य ने कहा...
रिचा को धैर्य की बात पसंद आई...रिचा बोली, तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं होगी ना...रिचा बोली
नहीं...नहीं...दिक्कत किस बात की...दो कमरें हैं...कोई दिक्कत नहीं होगी तुम्हें...धैर्य ने कहा...
ठीक है...मैं आज शाम को शिफ्ट हो जाऊंगी...रिचा बोली...
तुम किस होटल में रूकी हो, मुझे बता दो...शाम को मैं तुम्हें पिक कर लूंगा...धैर्य ने कहा...
रिचा, धैर्य को होटल का नाम बताकर चली गई...शाम में ठीक समय पर...धैर्य होटल पहुंच गया...और रिचा को पिक कर...अपने घर आ गया...
रात में दोनों के बीच काफी देर बातें होती रहीं...दोनों ने बीते तीन सालों की बात, एक दूसरे को बताई...फिर दोनों अलग-अलग कमरे में सोने चले गये...
 

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वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...।  दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...