पिछले कई दिनों से मैं अलग-अलग रिश्तों के बारे में सोच रहा था। हर तरह के रिश्तों के बारे में। और सोचते-सोचते मैं दुखी हुआ जाता हूं। वो कौन सी गर्माहट है, जिससे रिश्ते मुकम्मल होते हैं। और वो कौन सा पल होता है, जिससे रिश्ते खत्म हो जाते हैं। मैं यहां, उन रिश्तों के बारे में बात कर रहा हूं, जो खत्म हो जाता है...जिसे खत्म कर दिया जाता है।....
मैंने अपने जीवन में अब तक...3 हजार से ज्यादा क्राइम की स्टोरीज पर काम किया है। और किसी के जीवन में 3 हजार उदाहरण कम नहीं होते। मैंने देखा है...बाप को...अपने इकलौते बेटे का मर्डर करते हुए।...मैंने देखा है...मां को...अपने बेटे को जहर देकर मारते हुए। मैंने देखा है पत्नी को...अपने पति और बच्चों की हत्या करते हुए। मैंने देखा है उस शख्स को... जो एक कुल्हाड़ी उठाता है...और पूरे परिवार को काट डालता है। मैंने देखा है...उस बाप को... जो अपनी बेटी को सरेआम...केरोसिन डालकर जिंदा जला देता है।..और मैंने उस बेटी को भी देखा है...जो खाने में जहर मिलाकर अपने पूरे परिवार को खत्म कर देती है, ताकि वो अपने प्रेमी के साथ सुकून से रह सके। इतने सारे रिश्तों का कत्ल...मैं सोचता हूं, तो घबरा जाता हूं। हर किसी ने हर किसी का कत्ल किया है...और हर किसी ने मिलकर विश्वास का कत्ल किया है। मैंने देखा है...6 महीने की बच्ची से लेकर 80 साल की महिला तक से बलात्कार करने वालों को...। बस ये समझ लीजिए...हर तरह की बुराई...और हर तरह के बुरे इंसान को मैंने देख लिया है।...
अब आप कह सकते हैं, कि दुनिया बहुत अच्छी है...और बुरे आदमी कहां नहीं रहते।.. मैं भी अपने आप को यही कहता हूं।...मगर, यहां से मेरी ख्वाहिशें खत्म होने लगती हैं...और मैं अपने लिए एक काल्पनिक दुनिया बना लेता हूं। दूसरा विकल्प हो भी क्या सकता है ? जो दलील आप मुझे दे सकते हैं, हर उस दलील को मैं जानता हूं। मैंने इसपर अब बहस भी करना छोड़ दिया है..कि दुनिया खराब है या हसीन...। अब किसी भी तरह की विभत्सता मुझे विचलित नहीं करती। हां, मैं डरने लगा हूं...। एक अजीब सी लहर उठती रहती है।... और आंसू तो जैसे सूख चुके हैं मेरे अंदर के।... किसी चीज की फिक्र नहीं होती मुझे।
हां...कुछ होना चाहिए आपके पास...जिसके सहारे आप जिंदा रह सकें।...तो मेरे पास दो चीजें हैं.. जिनके सहारे मैं जिंदा हूं..। एक मुझे लिखना सबसे प्रिय है..। और मैं भरपूर लिखता हूं।... और दूसरी पापा का दिया गीता उपदेश...। उन्होंने मुझसे एक बार कहा था... सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ।
बस...जिंदा रहने के लिए दो ही चीजें हैं मेरे पास।....
मैंने अपने जीवन में अब तक...3 हजार से ज्यादा क्राइम की स्टोरीज पर काम किया है। और किसी के जीवन में 3 हजार उदाहरण कम नहीं होते। मैंने देखा है...बाप को...अपने इकलौते बेटे का मर्डर करते हुए।...मैंने देखा है...मां को...अपने बेटे को जहर देकर मारते हुए। मैंने देखा है पत्नी को...अपने पति और बच्चों की हत्या करते हुए। मैंने देखा है उस शख्स को... जो एक कुल्हाड़ी उठाता है...और पूरे परिवार को काट डालता है। मैंने देखा है...उस बाप को... जो अपनी बेटी को सरेआम...केरोसिन डालकर जिंदा जला देता है।..और मैंने उस बेटी को भी देखा है...जो खाने में जहर मिलाकर अपने पूरे परिवार को खत्म कर देती है, ताकि वो अपने प्रेमी के साथ सुकून से रह सके। इतने सारे रिश्तों का कत्ल...मैं सोचता हूं, तो घबरा जाता हूं। हर किसी ने हर किसी का कत्ल किया है...और हर किसी ने मिलकर विश्वास का कत्ल किया है। मैंने देखा है...6 महीने की बच्ची से लेकर 80 साल की महिला तक से बलात्कार करने वालों को...। बस ये समझ लीजिए...हर तरह की बुराई...और हर तरह के बुरे इंसान को मैंने देख लिया है।...
अब आप कह सकते हैं, कि दुनिया बहुत अच्छी है...और बुरे आदमी कहां नहीं रहते।.. मैं भी अपने आप को यही कहता हूं।...मगर, यहां से मेरी ख्वाहिशें खत्म होने लगती हैं...और मैं अपने लिए एक काल्पनिक दुनिया बना लेता हूं। दूसरा विकल्प हो भी क्या सकता है ? जो दलील आप मुझे दे सकते हैं, हर उस दलील को मैं जानता हूं। मैंने इसपर अब बहस भी करना छोड़ दिया है..कि दुनिया खराब है या हसीन...। अब किसी भी तरह की विभत्सता मुझे विचलित नहीं करती। हां, मैं डरने लगा हूं...। एक अजीब सी लहर उठती रहती है।... और आंसू तो जैसे सूख चुके हैं मेरे अंदर के।... किसी चीज की फिक्र नहीं होती मुझे।
हां...कुछ होना चाहिए आपके पास...जिसके सहारे आप जिंदा रह सकें।...तो मेरे पास दो चीजें हैं.. जिनके सहारे मैं जिंदा हूं..। एक मुझे लिखना सबसे प्रिय है..। और मैं भरपूर लिखता हूं।... और दूसरी पापा का दिया गीता उपदेश...। उन्होंने मुझसे एक बार कहा था... सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ।
बस...जिंदा रहने के लिए दो ही चीजें हैं मेरे पास।....
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