Monday, 5 February 2018

तुम मेरे लिए रसगुल्ला हो...

तुम मेरे लिए रसगुल्ले की तरह हो। सबसे प्रिय। जब मैं खाना खाता हूं, तो रसगुल्ला प्लेट में साइड में पड़ा रहता है। उस वक्त मैं बाकी चीजें खाता रहता हूं। रसगुल्ला सोचता रहता है, कि मैं उसकी उपेक्षा कर रहा हूं। एक नजर देखकर...फिर से बाकी चीजें खाने लगता हूं। रसगुल्ला मुझसे काफी गुस्सा होने लगता है। इसी बीच में जल्दी जल्दी खाना खाता हूं। जब बाकी का खाना खत्म हो जाता है, तो मैं...रसगुल्ले को प्लेट से उठाकर अंत में उसे खाता हूं, सबसे आखिर में। स्वाद लेकर। कई घंटे तक...रसगुल्ले की मिठास...मेरे मुंह में....मन में घुलती रहती है। मैं उस मिठास को महसूस करता रहता हूं...बिल्कुल तुम्हारी आवाज की तरह।.... बीच-बीच में मेरे मन की सरलता लड़खड़ाती रहती है...और कभी कभी निश्चिंत होकर...मैं सो भी जाता हूं।

दरअसल, मैं रसगुल्ले की उपेक्षा नहीं कर रहा होता। आपके पास जो अनमोल चीज होता है, उसे आप संभाल कर... बेहद संभाल कर रखते हैं।...उसे हम यूं ही हर चीज में मिला तो नहीं सकते ना। और एक दिक्कत ये भी है...कि उसे आंखों के सामने ज्यादा देर रखो...तो खुद की भी नजर लग जाती है। इसलिए गहने हम बैंक के लॉकर में रख देते हैं, खुद से बहुत दूर। ताकि, वो चोरी ना हो जाए।

सनम....तुम मेरे लिए रसगुल्ला हो।.....

No comments:

Post a Comment

डूबने वाले ने डूबते साहिल को आवाज दी...

वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...।  दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...