उसे पता था कि उसकी मौत होने वाली है. वो ये भी जानता था, कि वो मौत के रास्ते पर चल रहा है, मगर मंजिल उसे मौत से ज्यादा हसीन लग रही थी. अमेरिका के ट्विन टावर पर तनी रस्सियों पर चलना, वो भी बगैर किसी सुरक्षा के, मौत के रास्ते पर ही तो चलना है. फिल्म देखते वक्त फिलिप पेट्टी को मैं कई बार पागल कह बैठा. कई बार मुझे लगा कि कहीं मेरा ही हार्ट फेल ना हो जाए.. लेकिन जुनून जिंदगी से बढ़कर हो तभी असंभव पर विजय पाया जा सकता है.
कहानी असली थी. ऐसा सच में हुआ था. फ्रांस के कलाकार फिलिप पेट्टी की जिद थी ट्विन टावर रस्सी के सहारे पार करने की. जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर रस्सी पर खड़ा हीरो कहता है, 'ऐसा लग रहा है, कि ये टावर्स मेरा साथ दे रहे हैं, ये हवाएं मेरा साथ देने के लिए बह रहीं हैं. ये तार मेरे पैरों को सहारा दे रहा है'.
कहानी असली थी. ऐसा सच में हुआ था. फ्रांस के कलाकार फिलिप पेट्टी की जिद थी ट्विन टावर रस्सी के सहारे पार करने की. जमीन से सैकड़ों फीट ऊपर रस्सी पर खड़ा हीरो कहता है, 'ऐसा लग रहा है, कि ये टावर्स मेरा साथ दे रहे हैं, ये हवाएं मेरा साथ देने के लिए बह रहीं हैं. ये तार मेरे पैरों को सहारा दे रहा है'.
जिंदगी, जिद, पीड़ा, जख्म, नाम, साहस, पागलपन, मौत.....जीत.
नीचे जमीन पर सैकड़ों लोगों की भीड़ उस अविश्वसनीय दृश्य को साक्षात देख रही थी. सब खामोश...नि:शब्द. पसीना जब माथे का मुकुट बन जाए तभी तो दुनिया मानती है, कि हां...तुम कुछ हो.. मगर वो दुनिया को कुछ दिखाना या साबित करना नहीं चाह रहा था, वो तो बस एक सीख दे रहा था, असंभव कुछ नहीं है, बस चाहत होनी चाहिए..

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