Saturday, 27 May 2017

धर्म को मानने वाले लोगों का दिल बड़ा क्यों नहीं होता?

मैं बहुत से ऐसे लोगों से मिला हूं, जो बेहद धार्मिक होने का दावा करते हैं, लेकिन कुछ वक्त बात मैं महसूस करता हूं, कि उनका दिल छोटा रह गया है. छोटी छोटी बातों को वो बड़ा कर देते हैं. और ऐसे वक्त मुझे काफी आश्चर्य होता है, कि इन्होंने भगवान के बारे में पढ़कर क्या सीखा है ? पता नहीं क्या समझा है? और कभी कभी मैं इस नतीजे पर पहुंच जाता हूं, कि ये धर्म को धोखा दे रहे हैं. एक बाह्य आवरण में ये छलावे से कम नहीं है.
ऐसे लोगों से अच्छा तो मैं हूं, जो बड़ी बड़ी बातों को भी इसलिए इग्नोर कर देता हूं, कि छोड़ो ना, सब मोह माया है...
अब ये धर्म क्या सिखाता है... कि नेक काम करो, एक दिन जाना ही होगा...
अब मान लीजिए आप पांच लाख रुपया हर महीना कमाते हैं, तो क्या हो गया? हां आप बेहतर जिंदगी जी सकते हैं, मगर फिर आपके धार्मिक होने के दिखावे से क्या फायदा.
सिंपल सा मैं सोचता हूं, दिल बड़ा रखिए...

No comments:

Post a Comment

डूबने वाले ने डूबते साहिल को आवाज दी...

वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...।  दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...