कभी-कभी स्क्रिप्ट लिखते वक्त दिमाग में कुछ नहीं आता है, कि कैसे शुरूआत करें या कैसे आगे बढ़ा जाए. तब ऐसा लगता है, जैसे कोई भंवरा दिमाग के अंदर बंद हो गया हो, और बाहर निकलने के लिए बार-बार उड़ता हो, लेकिन दिमाग की जाली से टकराकर गिर जाता हो।...इस समय अंदर की बेचैनी और उथलपुथल से पार पाने के लिए मन हो रहा है, कि किसी रिंच या किसी औजार से दिमाग के दरवाजे को खोल दिया जाए, और भंवरे को मुक्त कर बेचैनी से निजात पाई जाए।...
Saturday, 27 May 2017
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डूबने वाले ने डूबते साहिल को आवाज दी...
वो एक खिलौना भर है...टूट जाना उसकी नीयति है..। वो टूट ही जाएगा...। फिर क्यों हम करें उसकी उम्मीद...। दूर एक धुंधला सा लैंप पोस्ट दिखता है।...
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मैं हंस रहा था. मैं खुश था. मैं बातचीत कर रहा था. मुझे भूख लग रही थी और काम खत्म करने के साथ ही मैं खाना खाने के लिए कैंटीन चल गया। लेकिन क...
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एक अदृश्य व्यूह है, जो इंसान को नफरती बना रहा है. शायद "अंधेरा कायम रहे" बोलने वाला तमराज किलविश इसके लिए जिम्मेदार है. वो नहीं च...
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कुछ सालों से मैं एक चित्र देखता आ रहा था. मैं उस चित्र को इतनी बारिकी से देखता था, कि धीरे धीरे उससे पहचान हो गई. उसके एक एक लकीर को मैं अच...
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