Wednesday, 18 January 2017

दिन का सपना

दिन में बहुत बेवक्त सो गया था मैं...और सोने के साथ ही मैं एक सजीव सपना देखने लगा.. इतना सजीव, कि जगने के बाद भी उस सपने का एक एक दृश्य मेरी आंखों के सामने है.. सपने का एक एक संवाद मेरे कानों ने साक्षात गुंज रहे हैं... 
मैंने देखा, एक लड़की है...वो अपने एक सहेली के साथ है... थोड़ी सी शर्माते हुए मुझे अपने पास बुलाती है.. वो मुझे कुछ कहने के लिए बुला रही थी... उसकी सहेली इशारों में कुछ भी नहीं कहने को बोल रही थी.. मगर लड़की ने अपनी सहेली की बात मानने से अस्वीकार कर दिया, और चुपचाप मेरे कानों में कहा... मैं तुम्हें पसंद करती हूं... हां, ठीक यही वाक्य था, इसे मैं अभी भी स्पष्ट सुन रहा हूं.. उसके लबों पर मुस्कुराहट की रेखाएं थीं, और आंखों में शर्माहट और शरारत का मिश्रण घुला हुआ था...
मैं बदले में बस मुस्कुरा कर रह गया... और उससे कहा - चलो एक कप चाय पीकर आते हैं!

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