दृश्य 1
कहीं किसी जगह पेड़ की एक शाख पर एक तोता और मैना रहते थे. दूर कहीं किसी और जगह एक और पेड़ की शाख पर एक तोता- मैना रहते थे. सभी अपनी अपनी जिंदगी में मगन.
एक दिन इधर वाली मैना संयोगवश उस तरफ वाले तोते से मिल गई. तोते में अजीब सम्मोहन था. मैना आकर्षण के जाल में कैद हो गई. मैना के साथी को मैना के दिल का हाल पता चल गया. लेकिन उसने मैना से कुछ नहीं कहा. मैना कुछ महीने उस तरफ वाले तोते के सम्मोहन में कैद रही. तोते ने भी अपने सम्मोहन में मैना को कैद रखा. मैना ये जानते हुए भी कि वो अपने साथी के साथ गलत कर रही है, वो तोते के सम्मोहन से आजाद नहीं हो पा रही थी.
दृश्य-2
एक शाख पर एक तोता और मैना रहते थे. दोनों अपने प्रेम में मगन. कहीं किसी और जगह एक शाख पर एक और मैना रहती थी. मैना संयोगवश इधर वाले तोते से मिली. मैना तोते के सम्मोहन में कैद हो गई. वो तोते को अपना बनाना चाहती थी. और तोता अपने साथी को छोड़ नहीं सकता था. मैना का आकर्षण चरम पर था. तोते को डर था, कि इस सम्मोहन के जाल को अचानक काटने पर मैना खुद को चोट पहुंचा सकती है. तोता बेहद मुश्किल में आ गया. वो अपनी मैना से अपनी बात कहने से डरता था, कि कहीं उसकी मैना उसे गलत ना समझ ले.!
सम्मोहन की दुनिया में कोई नियम नहीं होते. यहां ना कोई कायदा होता, ना कानून ना इथिक्स. कई लोग मैना को तो कई लोग तोते को गलत या सही ठहरा सकते हैं. दृश्य-1 वाली मैना गलत नहीं है. वो एक अनसुलझे मायावी की चाह में कैद हो गई थी. और दृश्य-2 में भी ऐसा ही है. तोते की भूमिका दोनों जगह एक सा ही है, वो नहीं चाहता, कि उसके आकर्षण की मदहोशी में कोई भी मैना खुद को चोट पहुंचाए.
आकर्षण की दुनिया अलबेली, अनसुलझी, अबूझ और अदृश्यता के कॉकटेल से बनी होती है. जहां मायावी लोग बसते हैं. कोई गलत नहीं होता. बस देखने का नजरिया होता है.
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