बचपन से ही मुझे टीवी देखने का बहुत शौक रहा है. मां कहती है, जब मैं साल भर का था, तभी से टीवी के सामने टकटकी लगाए बैठा रहता था. कुछ 3/4 साल की उम्र होने के बाद टीवी को लेकर मेरा आकर्षण काफी बढ़ गया. हालांकि मैं कुछ समझता नहीं था, लेकिन टीवी की दुनिया में हो रहे एक्शन मुझे काफी पसंद आते थे.
जब पर्दे पर हीरो चलता था तो बूट से एक टन-टन की आवाज आती थी. मुझे वो आवाज काफी पसंद थी. मुझे लगता था, कि फर्श पर टीन की चादर बिछा दी गई है और उस पर चलने से ये आवाज निकलती है. मैं पापा से जिद करता था, कि पूरे आंगन और घर में टीन की चादर बिछवा दीजिए. ताकि मैं चलूं तो वैसी ही आवाज निकलनी चाहिए. पापा हर बार अगली तारीख दे देते थे. मैं अब भी गांव जाता हूं, तो आंगन में टीन की चादर तलाशता हूं. मुझे मारधार वाले दृश्य बिल्कुल पसंद नहीं आते थे. रोमांस को मैं बचपन से ही पसंद करने लगा था. क्राइम फिल्में मेरी आखिरी च्वाइस होती थी. मीडिया फिल्ड में आने के बाद मुझे क्राइम शो बनाने का ही अवसर मिला. 8 साल के कैरियर में मैंने करीब पांच साल तक क्राइम शो ही प्रोड्यूस किया. मुझे मारपीट वाली नही. मुझे एक शांत दुनिया चाहिए थी. लेकिन मेरी यह ख्वाहिश टीन की चादर की तरह ही अभी तक अधूरा है...
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