Monday, 20 March 2017

सूखा इंसान

आज एक बेहद अजीब वाकया हुआ मेरे साथ। शाम में सोकर उठने के बाद मैं चाय बनाने लगा। घर में चूहों के करतबों को देखकर मैं मुस्कुरा रहा था कि मेरे रूम ऑनर किराया लेने के लिए आ गये। किराया देने के बाद मैंने उन्हें चाय पी लेने का आग्रह किया और वो चाय पीने के लिए तैयार हो गये। चाय बनाते-बनाते मैंने उनसे पूछा- कैसे हैं भैया...? कुछ पल चुप रहने के बाद उन्होंने कहा- ठीक नहीं हूं। मैंने पूछा क्या हो गया ? उन्होंने बेहद चुप खामोशी के साथ कहा- पता नहीं क्यों रोने का मन करता रहता है।
वो कमरे में इधर-ऊधर देखने लगे। मैं उनकी तरफ देख रहा था। लंबी चुप्पी के बाद उन्होंने कहा...अभी दुकान पर बैठा था, और रोने का मन करने लगा, तो इधर आ गया। घर में किसी चीज की कमी नहीं है। दोनों बेटों ने दो दुकानों को संभाल लिया है। घर में काफी पैसा आता है। पत्नी भी काफी अच्छी है, लेकिन मेरा हर वक्त छुप कर रोने का मन करता रहता है। हर पल गुस्से में भरा रहता हूं।
मैं उनका मर्ज समझ गया था। मैंने मुस्कुराते हुए उनसे पूछा- आप पूजा करते हैं? उन्होंने कहा- मेरी पत्नी करती है। मैंने कहा- आप खुद करते हैं ? उन्होंने कहा- नहीं। मैं समझ गया कि ये पैसा कमाते-कमाते अंदर तक सूख चुके हैं। इनके अंदर कुछ बचा नहीं है। मैंने कहा- मेरी एक बात मानेंगे ? उन्होंने कहा- हां बोलो... मैंने कहा- आप हर दिन श्रीमद् भागवत जी पढ़ा करिए। आप आत्मा से दूर हो गये हैं। अगर अब रोने का मन करे तो मेरे पास आ जाया करिए, मैं आपको श्रीमद् भागवत जी सुना दिया करूंगा, और मुझे यकीन है कुछ ही दिनों में आप बिल्कुल ठीक हो जाएंगे। उन्होंने कहा- पक्का...। मैंने उन्होंने विश्वास दिलाते हुए कहा- हां पक्का। भैया चले गये।
मैं अकसर प्रेम की बात करता हूं। दरअसल वो आत्मा वाला प्रेम है। ईश्वर से प्रेम करने की बात मैं करता हूं। अपने आत्मा से प्रेम करने की बात करता हूं। हम भौतिकता में इतना लिप्त हो चुके हैं, कि खुद को पूरी तरह से सुखा चुके हैं। हमें प्रेम की जरूरत है। हमें आत्मा से साक्षात्कार की जरूरत है। मैं कन्हैया को अपना सखा मानता हूं। और अपनी सारी बातें उन्हें बताता रहता हूं। इसलिए मेरे दोस्तों, अगर आप प्रेम से दूर हैं, तो अपने आराध्य के नजदीक जाईये। आत्मा से प्रेम करिए, फिर देखिए....आप सूखेपन से सदैव मुक्त हो जाएंगे।

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