Monday, 27 March 2017

चाय....

चाय बनाना मेरे लिए एक सुखद अहसास होता है. इसमें हमें किसी तरह के नियम में फंसना नहीं पड़ता. दूध, पानी और शक्कर का सरल समीकरण.. बस. और कुछ नहीं. मन है तो अदरक डाल दीजिए या इलायची. नहीं डालने का मन है, तो कोई बात नहीं. चाय फिर भी अच्छी बनेगी.
नियम के बगैर जो काम होता है, वो अच्छा लगता है मुझे. 
अब मैं लाल पेन से कोई फॉर्म क्यों नहीं भर सकता ? परीक्षा में लाल पेन का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकता ? इस नियम की जरूरत क्यों है ? दस्तखत मैं लाल पेन से क्यों नहीं कर सकता ? इंटरव्यू देते वक्त हंसने तक पर भी नियम क्यों लागू है. सब कुछ सरल क्यों नहीं है ? 
नियम निरर्थक होते हैं
चाय पीना सार्थक है...

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