एक बड़ा दरवाजा है और उसमें छोटी-छोटी खिड़कियां हैं। हम बाहर झांकते हैं, और फिर चुप हो जाते है। उस वक्त हमारे मन में कुछ नहीं चलता होता है। बाहर हमें बहुत तेज रफ्तार में भागता जीवन दिखता है। हम जीवन के रफ्तार को छूकर देखना चाहते हैं, पर हाथ छिल जाने के डर से खिड़की पर पर्दा लगा देते हैं। हम घर में अकेले होते हैं। और उस वक्त हमारे मन में मोहब्बत करने की इच्छा जग पड़ती है। हम फिर से खिड़की से पर्दा हटाकर किसी झुरझुरी याद में खो जाना चाहते हैं।
Tuesday, 30 January 2018
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