मैं अकसर कई लोगों को सपने में देखता हूं। किसी के साथ मुलाकात का दृश्य होता है... तो किसी के साथ कुछ संवाद का। कभी कभी तो ऐसा होता है ...कि मिलने के लिए मैं प्लानिंग करता रहता हूं...वो इंतजार करते रहते हैं...मुलाकात की सारी तैयारियां पूरी हो जाती हैं...लेकिन एन मुलाकात के वक्त मैं जाग जाता हूं। इस सपने की सबसे खास बात ये होती है...कि जिससे एक बार सपने में देख लिया, उसे दुबारा नहीं देखता। कभी नहीं। अगली बार फिर कोई और शकल...। अगली बार फिर से कोई और संवाद। एक बार मैं सपने में किसी के घर खाना खा रहा था। हम साथ खाना खा रहे थे...लेकिन, खाना खाने के साथ ही सब सफेद होने लगा और मैं जग गया। फिर मैं काफी देर तक सपने के बारे में सोचता रहा। जब किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे...तो कोई और सपना देखने लगा।
मैं तुम्हें कई बार सपने में देख चुका हूं। तुम बार बार आती हो...। और बार बार तुम्हें देखने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं, कि सपने में तुम्हें बार-बार देखना किसी किस्म का चमत्कार है। हां, मैं इसे चमत्कार ही मानता हूं। मैंने अभी तक किसी को तुम्हारा नाम नहीं बताया है। सच तो ये है..कि मैं खुद तुम्हारा नाम नहीं जानता। हां, सपने में मैं तुम्हें कई बार कहना चाहता था, कि तुम बहुत सुंदर हो। हां, बस इतना ही कहना था। ना इससे कुछ ज्यादा और ना ही इससे कम। बहुत सारे झूठ के बीच मैंने सोचा कि आज तुम्हें ये सच बात दूं। और अगर तुम फिर भी इसे झूठ समझोगी, तो इससे प्यारा झूठ और क्या हो सकता है।
मेरा मन कहता है, कि जिसे मैं सपने में देखूं, उसे इस बात की जानकारी दे दूं, पर मैं ऐसा नहीं करता। क्योंकि, इससे सवालों का सिलसिला शुरू होगा। और मैं किसी सवाल का जवाब नहीं देना चाहता। क्या होगा इतने सारे सवालों का जवाब देकर..? इसलिए मैंने सपने के बारे में किसी को बताने की बात त्याग दी। अब ऐसा होता है...कि मैं सपने में किसी को देखता हूं। फिर मैं उसके और अपने संबंध के बारे में सोचता हूं। एक धुंध में कुछ देर खुद को घिरा पाता हूं।...और फिर सब भूलकर वापस सो जाता हूं। जैसे अभी सो रहा हूं।

No comments:
Post a Comment