क्या असफल रहते हुए सफल संवाद लिखे जा सकते हैं ? क्या बिना सफलता मिले किसी कहानी में किसी किरदार को अंत में संघर्षों के बाद उसे सफलता के शिखर पर चढ़ा हुआ लिखा जा सकता है ? आसान शब्दों में अगर मैं कहूं, तो क्या उस कहानी को...उस किरदार को सफल माना जाएगा। या फिर उसे सिर्फ दिमागी वहम मानकर सिरे से खारिज कर दिया जाएगा। काफी शंकाओं के बीच मैंने कई कहानिया शुरू कीं, मगर उसे बीच में ही अधूरा छोड़ उस कहानी को लिखना बंद कर दिया। वो किरदार अकसर मुझसे शिकायत करते रहते हैं। मगर, मैं उसे पूरा करने से कतराता रहता हूं। बिना मेरे सफल हुए मेरी कहानी का किरदार कैसे सफल हो सकता है। या फिर, जब मेरी कहानी का किरदार सफल होगा, उसके बाद मुझे सफल माना जाएगा। एक झिझक है...एक डर है... कहानी को आगे बढ़ाने के खयाल से ही हाथों में कंपन होने लगती है, और मैं कहानी को पूरा करने का खयाल त्याग किसी और कहानी की तलाश में लग जाता हूं।
जैसे मैं चाहता हूं, कि मेरी कहानी का एक किरदार अंत में जाकर...कई सारे संघर्षों से जूझते हुए अपना मुकाम हासिल कर ले...लेकिन, मैं उसे सफल नहीं बनाता। संघर्षों के साथ उसे छोड़ देता हूं। मुझे लगता है, कहानी तो उसी की बनती है ना...जो सफल हो चुका है। और जो सफल नहीं हुआ है, भला उसकी कहानी कैसे बन सकती है। उसके संघर्षों से लोग क्या सीखेंगे ? उसके संघर्षों को जानकर लोग क्या करेंगे ? जैसे आज सुबह मेरे अजीज मित्र ने मुझसे कहा... कि या तो तुम भविष्य में काफी बड़े राइटर बन ही जाओगे, या फिर बर्बाद ही हो जाओगे। मैंने भी अपने बारे में यही अनुमान लगा रखा है। वैसे बर्बाद होने का अनुमान कुछ ज्यादा है।
वैसे आजकल मैं सोच रहा हूं, कि एक रिस्क ले लिया जाए। कुछ किरदारों को सफल कर देते हैं। संघर्षों का नजीता और कहानी का अंत हैप्पी कर देते हैं। लेकिन एक सवाल जो अभी मेरे मन में है, कि क्या किसी किरदार को सफल कर देने पर मैं खुश हो पाऊंगा ? पता नहीं, अभी मेरे पास इसका जवाब नहीं है। और इसके लिए मुझे किसी कहानी को उसके अंजाम पर पहुंचाना होगा।
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