अनजाने में की गई
गलती हर्ष के लिए नाकाबिले-माफी बन चुकी थी। वो लड़की जिसके चेहरे को हाथों में
लेने से उसका दिल, किसी बच्चे की तरह मचल उठता है, वो उसे बदनाम... ये सोच भी वो कैसे
सकता है? वो लड़की, जिसे सीने से लगाए वो अनकहे किस्से सुनाता है, उसे वो भला रुसवा
कैसे कर सकता है? और जो उसके और रागिनी के दरम्यां हुआ था, वो अकेले उसकी ही
मर्जी तो नहीं थी? दोनों अपनी मर्जी से करीब आये थे। लेकिन ये मर्जी की लड़ाई कहां थी? इस गुस्से का मतलब
था विश्वास की बुनियाद का दरकना। और वो जानता था, कि जहां प्यार है, वहां यकीन का अलाव
हमेशा जलना चाहिए। नहीं, तो रिश्ते का महत्व नहीं रहता।
हर्ष जितना सोचता, उससे ज्यादा सवाल
उसकी जेहन को झकझोड़ने के लिए आ जाते। रागिनी तो उसका फोन रिसीव ही नहीं कर रही
थी। हर डायल के बाद फोन बस यही जवाब देता, कि आपने जिस नंबर को डायल किया है, वो इस समय जवाब
नहीं दे रहा।
हर्ष का कमरा
सिगरेट की धुएं से भरा था। माथे का पसीना उसका पाप बनकर उसकी पेशानी पर बार-बार आ
धमकता। और वो पसीने की बूंद को पोंछने की कोशिश भी नहीं करता। वो तो बस एक बार
रागिनी का आवाज सुनना चाहता है। अपनी बात कहना चाहता है। वो बेवफा नहीं है, रागिनी को समझाना
चाहता है। जो कुछ भी हुआ है,
वो एक गलतफहमी से इतर कुछ भी नहीं, प्रेम अपने मन पर
आधारित होता है, बाहरी परिस्थितियों पर नहीं। कोई उनके बारे में क्या सोच रहा है, इससे उन्हें क्या
मतलब? मगर, रागिनी फोन उठाए तब ना वो सफाई दे।
अगले दिन रागिनी जब
दफ्तर आई, तो वो भावहीन थी। ना गुस्सा, ना प्यार, ना संवेदना। कुछ भी
नहीं। हर्ष ने उससे बात करने की कोशिश की, तो उसने साफ कह दिया,
--हर्ष, हमारे बीच का रिश्ता अब खत्म हो चुका
है। अब तुम मुझसे कॉन्टेक्ट करने की कोशिश मत करना।
-- क्या, ऐसे कैसे हो सकता है रागिनी? इस रिश्ते को एक
गलतफहमी की वजह से मत खत्म करो। रिश्ता तो सहेज कर रखने की चीज है। और जो तुम सुन
रही हो, उससे मेरा कोई लेना देना नहीं है। दफ्तर के कुछ लोग हमारे रिश्ते
खुश नहीं हैं। और वो तुम्हें बर्गलाने की कोशिश कर रहे हैं।
-- मुझे तुमसे कोई मतलब नहीं है हर्ष। अब
मैं तुमसे कोई बात नहीं करना चाहती। लीव मी अलोन। ओके
रागिनी अपने काम
में व्यस्त हो गई। हर्ष वहीं खड़ा-खड़ा रागिनी को निहारता रहा। उसकी परेशानी, उसका दर्द मानो
उसकी आंखें फाड़कर बाहर आ जाना चाहता था। दिन बीतते गये, और अब तो हर्ष को
मैसेज के बदले गालियां मिलने लगीं थी। उसे वाट्सएप पर ब्लॉक कर दिया था रागिनी ने।
लेकिन, हर्ष लगातार मैसेज किए जा रहा था। रागिनी ने तो एक मैसेज में यहां
तक कह दिया,
--तुम मर जाओ उससे भी मुझे कोई मतलब
नहीं है।
हर्ष किसी आम
प्रेमी की तरह ही खुद को शराब और सिगरेट के नशे में बेसुध कर चुका था। कमरे की
तनहाई ने उसके मन में आत्महत्या करने तक का ख्याल ला दिया । अरे, इतना भी क्या
गुस्सा, कि एक बार बात तक ना करना चाहे? क्या इतने दिनों का प्यार एक गलतफहमी
की वजह से खत्म हो सकता है? कमरे में भरे सिगरेट के धुएं ने उसकी आंखों को सुर्ख लाल कर दिया
था। और गुस्से ने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया था। और उसने पंखे से रस्सियों को
बांधकर अपने लिए मौत का फंदा तैयार कर लिया। उसने रागिनी को आखिरी मैसेज किया...
--ठीक है, तुम्हारे उठाए गये हर कदम को मैं
चूमता हूं। चाय ज्यादा नहीं पीना। तुम्हें माइग्रेन है ना। खाना वक्त से खाना। ये
नहीं कि रात 10 बजे घर पहुंचती हो, तो डिनर के बदले मैगी खाकर सो जाना।
पापा, मम्मी, कार्तिकेय, किर्तिका का ध्यान रखना, ठीक वैसे ही, जैसे मैं अपनी
मम्मी, पापा और बहनों का ख्याल रखता हूं। तुम्हारी बहन फैशनेबल है ना, मेरी छोटी बहन की
तरह? वो मुझे बिग-बी कहकर पुकारती है। लंच लेकर हमेशा ऑफिस जाना। ऑफिस
में लोगों से अच्छे से पेश आना। अगर मैं गलत हूं, तो मेरी गलती को भी माफ करोगी। ये
शायद आखिरी मैसेज है। तुम मेरी जिंदगी में हसीन दुश्मन बनकर आई। गुड बाइ
सिर्फ तुम्हारा
हर्ष
हर्ष ने रागिनी को
आखिरी मैसेज कर दिया था। और फिर स्टूल पर खड़ा होकर फांसी के फंदे को अपनी गर्दन
में डाल लिया। उसकी आंखों के सामने रागिनी के साथ बिताए गये एक-एक पल तैरने लगे।
आंखों से आंसुओं की धार बहती जा रही थी। हर्ष अपनी जिंदगी को खत्म करने का फैसला
कर चुका था। अब बस स्टूल का गिरना बचा था, कि तभी उसके फोन की घंटी बजी।
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