Saturday, 18 February 2017

हसीन दुश्मन-- ((आखिरी हिस्सा))

फांसी का फंदा गले में डाले हर्ष ने अपनी जिंदगी का आखिरी फैसला कर लिया था। वो स्टूल को गिराने ही वाला था, कि अचानक बजी फोन की घंटी ने हर्ष का ध्यान तोड़ दिया। फंदे को गले से निकालकर उसने बिस्तर पर पड़े फोन को हाथों में उठाया। स्क्रीन पर उसकी छोटी बहन का नंबर उभर रहा था।
--हलो, सुनो बिग-बी, मुझे काले रंग का सूट चाहिए। मैंने फोटो भेज दिया है। अभी ऑर्डर कर दो। मुझे ये सूट हर हाल में चाहिए।

फोन पर उसकी छोटी बहन कड़कती आवाज में उससे सूट दिलवाने की फरमाईश कर रही थी। किसी तरह फोन पर अपनी बहन को सूट दिलवा देने की बात कहने के बाद हर्ष ने मोबाइल डिस्कनेक्ट किया, और फफक-फकर...किसी बच्चे की तरह रोने लगा। कुछ पल पहले तक आत्महत्या करने का ख्याल करने वाले हर्ष के दिमाग में, अब मां पापा और छोटी बहन की तस्वीर, किसी बिजली की तरह कौंधने लगी थी।

--वो किसके लिए अपनी जिंदगी खत्म कर रहा था। उसके लिए, जिसने उसे उस वक्त भी देखना जरूरी नहीं समझा, जब हो एक्सीडेंट के बाद हॉस्पीटल में पड़ा था। तमाम दोस्त आये, और खबर मिलने के बाद भी रागिनी नहीं आई।
--अब हर्ष ने आत्महत्या करने का ख्याल अपने जेहन से निकाल दिया था। बहन हर्ष की जिंदगी में फरिश्ता बनकर आई थी।
--अगले दिन जब हर्ष दफ्तर पहुंचा, तो दफ्तर में सब उसे बदले नजर आये। कोई उससे सही तरीके से बात भी नहीं कर रहा था। उसे पता चला, कि रागिनी ने पूरे दफ्तर वालों से कहा है, कि हर्ष उसके पीछे पड़ा है। उसे धमकियां दे रहा है। साथ काम करने वाले जो लोग कल तक उससे बात करने से भी हिचकिचाते थे, वो उसे नफरत भरी निगाहों से देख रहे हैं। मीटिंग में बॉस ने हर्ष से स्पेशल शो भी ले लिया। दफ्तर में अब उसे करने के लिए कुछ नहीं बचा था।
-- अपमान का घूंट पीते हुए भी हर्ष दफ्तर में काम करने के लिए मजबूर था, क्योंकि, घर की जिम्मेदारी उसके ऊपर थी। वो बदनाम किया जा चुका था। हर्ष अब सिर्फ अपने काम से मतलब रखने लगा था।
--कुछ महीने इसी तरह बीत गये। अचानक एक दिन शाम के वक्त हर्ष के मोबाइल पर रागिनी का मैसेज आया। ‘’ हर्ष मुझे रूम चेंज करना है, और मुझसे अकेले हो नहीं रहा है, क्या तुम हेल्प कर दोगे।
--हां, मैं आ जाता हूं-
--नहीं, तुम मत आओ, किसी हेल्पर को भेज दो, मेरे साथ मेरे पापा हैं
--हर्ष ने एक हेल्पर का नंबर रागिनी के मोबाइल पर मैसेज कर दिया. रागिनी का मैसेज फिर से मिलने के बाद हर्ष जिस प्यार के दर्द को अब बर्दाश्त करना करना सीख रहा था, वो प्यार फिर से जग उठा। उसे लगा, कि शायद रागिनी अब मान जाएगी। हर्ष ने आखिरी बार रागिनी को अपनी जिंदगी में लाने की सोची। और रागिनी के नंबर पर लौट आने की मनुहार की। रागिनी ने मैसेज का उत्तर देते हुए कहा—देखते हैं। रागिनी ने वाट्सएप पर भी हर्ष को अनब्लॉक कर दिया था।
-- दो दिन गुजर गये
--दो दिन बाद हर्ष को ऑफिस में किसी ने बताया, कि रागिनी ने दफ्तर से इस्तीफा दे दिया है। उसे किसी बड़े चैनल में नई जॉब मिली है। हर्ष मन ही मन मुस्कुराने लगा। वो समझ गया, कि रागिनी ने उसका इस्तेमाल किया है। उसने रागिनी को मैसेज में नई जॉब मिलने की बधाई दे दी। बदले में कोई जवाब नहीं आया। रागिनी दफ्तर से जा चुकी थी। और दफ्तर से जाने के साथ ही फिर से हर्ष को वाट्सएप पर ब्लॉक कर चुकी थी।

--वक्त के मरहम ने हर्ष के जख्मों पर लेप लगाया, तो धीरे-धीरे हर्ष की जिंदगी भी रास्ते पर लौटने लगी।
--6 महीने बीत चुके था। हर्ष को भी नई नौकरी मिल चुकी थी। दोनों अपने-अपने रास्ते पर... अपने-अपने काम में मग्न हो गये। हर्ष नये जोश के साथ नये दफ्तर में काम कर रहा था, क्योंकि उसे पैसे इकट्ठे करने थे, अपनी छोटी बहन की शादी के लिए। सैलरी बढ़ाने के लिए वो एक बार फिर चैनल बदलना चाहता था।
--एक दिन हर्ष को पता चला, कि उस चैनल में जॉब के लिए वेकेंसी निकली है, जहां रागिनी काम कर रही है। कुछ देर सोचने के बाद हर्ष इंटरव्यू देने पहुंच गया। अपनी हाजिरजवाबी और काम में निपुण हर्ष इंटरव्यू क्वालीफाई कर चुका था। अब उसे फाइनल इंटरव्यू देने के लिए जाना था। फाइनल इटरव्यू की तारीख और वक्त तय हो चुका था। फाइनल इंटरव्यू वाले दिन जब वो तैयार होकर घर से निकलने वाला था, कि नये दफ्तर के एचआर की तरफ से उसे फोन पर बताया गया, कि उसका इंटरव्यू कैंसिल हो चुका है। हर्ष स्तब्ध था। सलेक्शन होने के बाद उसे फाइनल इंटरव्यू से पहले खारिज कर दिया गया था।
कुछ दिनों बाद हर्ष को पता चला, कि रगिनी उसे इंटरव्यू वाले दिन देख चुकी थी। और ऑफिस में शिकायत कर दी, कि हर्ष का कैरेक्टर काफी खराब है। इसलिए उसे नौकरी पर नहीं रखा जाए। रागिनी के कंप्लेन के बाद हर्ष को नौकरी नहीं देने का फैसला किया गया था।
--हर्ष एक बार फिर से बेचैन हो चुका था। वो तय नहीं कर पा रहा था, कि जिस रागिनी को वो भूलने की कोशिश कर रहा है, वो उसकी जिंदगी में फिर से भूचाल क्यों लाना चाहती है। कोई दुश्मन भी किसी के पेट पर लात नहीं मारता। रागिनी ने तो उससे उसकी नौकरी ही छीन ली थी।
कई दिनों तक बेचैन रहने के बाद हर्ष ने फैसला किया, कि वो रागिनी को कुछ नहीं कहेगा। अपने कैरेक्टर पर दाग लगने के बाद भी हर्ष ने फैसला किया, कि वो रागिनी को पता नहीं चलने देगा, कि उसे सारी बातें पता चल चुकी हैं। हर्ष अब रागिनी को हसीन दुश्मन मानने लगा था।

अब हर्ष ने एक फैसला लिया है...जिंदगी में इतना आगे निकल जाने का फैसला...जहां तक रागिनी की सोच भी नहीं पहुंच सके।

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