Thursday, 23 February 2017

पैटर्न का बहिष्कार

हम अकसर जीवन को सांस लेते देखते हैं और हम पाते हैं एक पैटर्न है, जिसपर हम रेंगते रहते हैं. मैंने एक फिल्म देखी A beautiful mind. एक बने बनाए पैटर्न को चुनौती देने वाली एक सच्ची कहानी, जिसमें नायक पागल ठहरा दिया जाता है, लेकिन वो बने बनाए पैटर्न पर लौटने से इनकार कर देता है. साइंटिस्ट जॉन नेश शुरू से ही मेरे आदर्श रहे हैं. बहुत कम ही लोग मेरे आदर्श हैं, या बहुत कम लोग हैं जिन्हें मैं पैटर्न का बहिष्कार करते हुए देखता हूं.
एक मूर्तिकार पहले गीली मिट्टी से खेलता है, और फिर चाक पर गिली मिट्टी को जोर-जोर से घुमाना शुरू कर देता है. धीरे धीरे एक संरचना, एक आकार का दिखना शुरू हो जाता है. मैं अकसर उस आकार को देखता हूं और धीरे से मुस्कुराता हूं. मैं मूर्तिकार नहीं हूं. लेकिन संरचना का बनना मुझे अच्छा लगता है, मुझे चाक भी पसंद नहीं है, मैं हाथों से संरचना गढ़ना चाहता हूं. मैं पैटर्न का हिस्सा नहीं बनना चाहता. खामोशी से उस पैटर्न का बहिष्कार कर रहा हूं. एक नई संरचना गढ़ना चाहता हूं. इसमें मुझे सुख मिलता है. मैं बच्चा हो जाता हूं. बच्चा बनने का अभिनय कर भी मैं खुश होता हूं. एक गहरी सांस लेता हूं और कमरे में पसरे सन्नाटे में खुद को देखने लगता हूं.

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