Wednesday, 23 May 2018

अधूरी कहानी...

रात के करीब 3 बजने वाले हैं...और मेरा मन तुम्हें एक कहानी सुनाने का कर रहा है। कोई भी कहानी नहीं... एक प्यार वाली झूठी कहानी। जिसके अंत में प्रेमी-प्रेमिका मिल जाते हैं। मैं सच्ची कहानी सुनाकर तुम्हें रूलाना नहीं चाहता। या फिर एक राजा और एक राक्षस की कहानी। और मैं अंत में उस राक्षस को मरने ना दूं। उसे ज़िंदा रखूं, ताकि, अगली बार वो कहानी मैं वहीं से शुरू कर सकूं।

वो बिस्तर पर लेटा हुआ मोबाइल में कुछ से कुछ कर रहा था। तभी उसे एक सोशल नेटवर्क पर एक लड़की की तस्वीर दिखाई दी। उसका चेहरा देखते ही...वो सम्मोहन से भर गया। वो नज़र नहीं हटा पा रहा था। वो उस लड़की को बार-बार देखता रहा। कुछ चाहनाएं जगीं...कुछ सपने जगे...। वो रात भर जगा रहा...एक कविता गढ़ने की कोशिश करता रहा...। और अंत में वो एक कविता लिखने में सफल भी रहा। वो किसी के मार्फत कविता उस लड़की तक पहुंचाने में सफल भी रहा......।

नहीं...इससे ज्यादा मैं ये कहानी नहीं लिख सकता। ये एक बेहद खूबसूरत कहानी है...जिसे मैंने बाद में बहुत खराब कर दिया। इसलिए नहीं...अब मैं ये कहानी नहीं लिख सकता।

लौट आओ सजना...मेरा दिल पुकारे रे...। मेरा मन अभी ये गीत गाने का कर रहा है।



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