Friday, 25 May 2018

उदास रात

तस्वीर काफी पुरानी है।
उदास रात को जरा सी स्पाइसी बनाने के लिए
हमने पी ली 2 पैग शराब
जरा सी गुस्ताखी की...
और बना दिए तुम्हारे होठों पर एक लाल निशान
तुम कहो तो खुद को बिखेर दूं तुम पर....

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अभी मैं अपने अफसोसों को रख रहा हूं
कंप्यूटर टेबल के नीचे
जहां हर रात मैं लड़ता रहता हूं लड़ाई
और तुम्हें मेरी कसम मेरे महबूब
तुम तो वहां आना ही मत
कि बस एक यही काम तो बचा है मेरे पास

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फोन में हजारों तस्वीरें सोई हुई हैं
उनमें से जगाता हूं एक तस्वीर
अब तुम्हारी नींद इस वक्त टूट गई
तो इसमें मैं अपना कसूर नहीं मानता हूं

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सब कुछ तुम्हारे ही बारे में है
प्याले में भरी आधी कच्ची शराब
फ्रीज में रखा हुआ बर्फ के बारीक टुकड़े
प्लेट में रखा हुआ साबूत मिर्च
पंखे पर बैठा हुआ कबूतर
और मन में विचारों के हाथी और खरगोश

सबकुछ उसी के बारे में है...जो है ही नहीं।

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रात के चार बजे हैं। यहां गली के कुत्ते बहुत भौंकते हैं। मन गुस्से से भर जाता है। इनदिनों मैं गुस्सा बहुत करने लगा हूं। खैर जाने तो... मेरे गुस्से से कौन सा कुत्ते भौेंकना बंद कर देंगे।





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