चमत्कार क्या है, बड़ी बात क्या है?
धरती पर दो ही चीज शाश्वत सत्य है, जन्म और मरण. जीवन में इनके अलावा एक और चीज को मैं महत्वपूर्ण मानता हूं, वो है किसी की जिंदगी बचा लेना. जैसे किसी घायल को या बीमार को वक्त रहते अस्पताल पहुंचा देना. इनके अलावा इंसानी जिंदगी में हर चीज क्षणभंगुर है. रुपया-पैसा, एश-ओ-आराम, किसी भी चीज की कोई अहमियत नहीं है. कोई बात बड़ी नहीं है. रुपया नहीं कमा पाए ना, कोई बात नहीं. गाड़ी छूट गई, कोई बात नहीं..अरे जीवन है ना, बस वही चमत्कार है, बड़ी बात है.
रायबरेली में एक दुकान पर हम और अंबेश बैठे बात कर रहे थे. अंबेश के कुछ दोस्त भी साथ में थे. जाते वक्त एक दोस्त बाइक पर बैठा, और बाइक रिवर्स करने लगा. तभी पीछे से एक तेज रफ्तार दूसरी बाइक आई, और इस बाइक से बुरी तरह टकराई. अंबेश का दोस्त वहीं गिर गया. मगर दूसरा बाइक वाला बाइक समेत कुछ फीट उछलता हुआ, कई फीट आगे जा गिरा. सामने से तेज रफ्तार ट्रक मौत बनकर बाइक वाले की तरफ बढ़ रही थी. ये पूरा वाकया हम लोगों के सामने इतनी तेजी से घट रहा था, कि हमारा मुंह खुल चुका था. दोनों हाथ माथे पर जा चुका था. तभी ट्रक वाले ने किसी तरह ब्रेक लगाया और बाइक वाले के पास जाकर ट्रक रूक गया. बाइक वाले की किस्मत अच्छी थी. वो बच गया. लोग दौरे. दोनों बाइक सवारों को उठाया. दोनों में किसी को चोट नहीं लगी, ये भी हमारे लिए एक शुभ चमत्कार ही था.
ऐसे हादसे होते रहते हैं. लोग जाते रहते हैं... तो फिर बड़ी बात क्या है...? बड़ी बात बस एक है, जिम्मेदारी निभाना. हम जैसे इंसान जो जिम्मेदारियों से भागते रहते हैं, उनके लिए ऐसी घटना सबक होती है, कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं. चाहने वालों को खुश रखे..बाकी बड़ी बात कुछ नहीं है.
धरती पर दो ही चीज शाश्वत सत्य है, जन्म और मरण. जीवन में इनके अलावा एक और चीज को मैं महत्वपूर्ण मानता हूं, वो है किसी की जिंदगी बचा लेना. जैसे किसी घायल को या बीमार को वक्त रहते अस्पताल पहुंचा देना. इनके अलावा इंसानी जिंदगी में हर चीज क्षणभंगुर है. रुपया-पैसा, एश-ओ-आराम, किसी भी चीज की कोई अहमियत नहीं है. कोई बात बड़ी नहीं है. रुपया नहीं कमा पाए ना, कोई बात नहीं. गाड़ी छूट गई, कोई बात नहीं..अरे जीवन है ना, बस वही चमत्कार है, बड़ी बात है.
रायबरेली में एक दुकान पर हम और अंबेश बैठे बात कर रहे थे. अंबेश के कुछ दोस्त भी साथ में थे. जाते वक्त एक दोस्त बाइक पर बैठा, और बाइक रिवर्स करने लगा. तभी पीछे से एक तेज रफ्तार दूसरी बाइक आई, और इस बाइक से बुरी तरह टकराई. अंबेश का दोस्त वहीं गिर गया. मगर दूसरा बाइक वाला बाइक समेत कुछ फीट उछलता हुआ, कई फीट आगे जा गिरा. सामने से तेज रफ्तार ट्रक मौत बनकर बाइक वाले की तरफ बढ़ रही थी. ये पूरा वाकया हम लोगों के सामने इतनी तेजी से घट रहा था, कि हमारा मुंह खुल चुका था. दोनों हाथ माथे पर जा चुका था. तभी ट्रक वाले ने किसी तरह ब्रेक लगाया और बाइक वाले के पास जाकर ट्रक रूक गया. बाइक वाले की किस्मत अच्छी थी. वो बच गया. लोग दौरे. दोनों बाइक सवारों को उठाया. दोनों में किसी को चोट नहीं लगी, ये भी हमारे लिए एक शुभ चमत्कार ही था.
ऐसे हादसे होते रहते हैं. लोग जाते रहते हैं... तो फिर बड़ी बात क्या है...? बड़ी बात बस एक है, जिम्मेदारी निभाना. हम जैसे इंसान जो जिम्मेदारियों से भागते रहते हैं, उनके लिए ऐसी घटना सबक होती है, कि वो अपनी जिम्मेदारी निभाएं. चाहने वालों को खुश रखे..बाकी बड़ी बात कुछ नहीं है.
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