उसके बॉस ने ((मेरे एक IT में काम करने वाले मित्र को)) नामालूम क्यों उसे जमकर फटकार लगाई थी. उसे सबके सामने बुरी तरह जलील किया था. वो चुपचाप फटकार सुनता रहा, गर्दन झुकाए...बिना जवाब दिए. डांट-फटकार सुनने के बाद वो वापस अपने काम में लग गया.
आज मैंने उसकी एक तस्वीर देखी. वो अपनी बीवी और बेटी के साथ किसी मॉल में था. वो बेहद खुश लग रहा था. मैं समझ गया, कि बस इसी खुशी की खातिर वो उतनी डांट झेल गया. वरना वो अपने बॉस का दांत तोड़ सकता था. बाल पकड़कर अपने बॉस को घसीट सकता था.
मेरा मानना है, कि कभी भी किसी को किसी भी बात के लिए डांटना नहीं चाहिए या किसी पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए. क्षणिक गुस्सा हो सकता है, मगर उसके लिए जलील करना जरूरी नहीं है. हर कोई अपने स्तर तक समझदार होता है. और किसी को इस भ्रम में भी नहीं रहना चाहिए कि उसके अंदर आइंस्टीन वाला दिमाग फिट है. हां, अगर कुछ गलतियां हो रही हैं तो प्यार से समझाया जा सकता है.
और इंसान को इतना तो याद रखना ही चाहिए... कि जब अकबर धूल में मिल गया.. अलेक्जेंडर को शिकस्त का सामना करना पड़ा, राणा प्रताप को घास चबानी पड़ी, तो हम भी कोई तुर्रम खां तो हैं नहीं...
इसलिए...सभी इंसान को प्रेम से पेश आना चाहिए... ताकि आपके अवसान के वक्त भी वो आपसे प्रेम से पेश आए...
आज मैंने उसकी एक तस्वीर देखी. वो अपनी बीवी और बेटी के साथ किसी मॉल में था. वो बेहद खुश लग रहा था. मैं समझ गया, कि बस इसी खुशी की खातिर वो उतनी डांट झेल गया. वरना वो अपने बॉस का दांत तोड़ सकता था. बाल पकड़कर अपने बॉस को घसीट सकता था.
मेरा मानना है, कि कभी भी किसी को किसी भी बात के लिए डांटना नहीं चाहिए या किसी पर भी गुस्सा नहीं करना चाहिए. क्षणिक गुस्सा हो सकता है, मगर उसके लिए जलील करना जरूरी नहीं है. हर कोई अपने स्तर तक समझदार होता है. और किसी को इस भ्रम में भी नहीं रहना चाहिए कि उसके अंदर आइंस्टीन वाला दिमाग फिट है. हां, अगर कुछ गलतियां हो रही हैं तो प्यार से समझाया जा सकता है.
और इंसान को इतना तो याद रखना ही चाहिए... कि जब अकबर धूल में मिल गया.. अलेक्जेंडर को शिकस्त का सामना करना पड़ा, राणा प्रताप को घास चबानी पड़ी, तो हम भी कोई तुर्रम खां तो हैं नहीं...
इसलिए...सभी इंसान को प्रेम से पेश आना चाहिए... ताकि आपके अवसान के वक्त भी वो आपसे प्रेम से पेश आए...
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